जगन्नाथ रथयात्रा विवाद: पुरी के गजपति महाराज ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, ISKCON की अलग तारीखों पर जताई आपत्ति

कहा- शास्त्रों के अनुसार ही हो रथयात्रा और स्नान यात्रा, परंपरा की रक्षा के लिए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
पुरी। ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भगवान जगन्नाथ की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने की अपील की है।
8 जुलाई को भेजे गए पत्र में उन्होंने ISKCON द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर आपत्ति जताई है।
श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के स्थायी अध्यक्ष गजपति महाराज ने कहा कि रथयात्रा और स्नान यात्रा की तिथियां शास्त्रों और परंपराओं से निर्धारित हैं।
ऐसे में अलग समय पर इन आयोजनों से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और सदियों पुरानी परंपरा प्रभावित होती है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
गजपति महाराज जगन्नाथ संस्कृति में भगवान के प्रथम सेवक माने जाते हैं। रथयात्रा के दौरान रथों पर स्वर्ण झाड़ू लगाने की पवित्र ‘छेरा पंहरा’ परंपरा भी वही निभाते हैं। वर्ष 1970 में मात्र 17 वर्ष की आयु में उनका राज्याभिषेक हुआ था।
विवाद की वजह यह है कि इस वर्ष ISKCON ने 14 जून को न्यूयॉर्क, 21 जून को लंदन और 5 जुलाई को सिडनी में रथयात्रा निकाली, जबकि पुरी में स्नान पूर्णिमा 29 जून को हुई और मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को आयोजित होगी।
गजपति महाराज ने मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी आपत्ति जताई है।
वहीं ISKCON का कहना है कि विदेशों में स्थानीय मौसम, प्रशासनिक नियमों और परिस्थितियों के कारण हर जगह पुरी की तिथि पर आयोजन संभव नहीं होता।
संस्था का तर्क है कि भगवान जगन्नाथ का संदेश दुनिया भर तक पहुंचाने और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तिथियां तय की जाती हैं।





