बालोद

Lord Ganesha Temple: यहां दर्शन मात्र से पूरी होती है हर मनोकामना, मंदिर में लगा रहता है भक्तों का तांता, बहुत खास है गणपति का ये मंदिर, देखिए

शिव जायसवाल@बालोद। (Lord Ganesha Temple) छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में जमीन के भीतर से प्रगट भगवान गणेश नि:संतान दंपती को संतान प्राप्ति का सुख देते हैं. यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के अलावा पूरे सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है. इसके अलावा इनके दर्शन मात्र से लोगों की मनोकामना पूरी होने की मान्यता है. इस वर्ष कोरोना संक्रमण को लेकर बड़ा आयोजन इस गणेश मंदिर में नहीं हो रहा है. पर भक्तों की भीड़ आज देखने को मिली जमीन से निकले स्वयं-भू भगवान गणपति के प्रति लोगों की आस्था और श्रद्धा बढ़ती ही जा रही है।  सबसे पहले दो लोगों ने मूर्ति स्थापित कर पूजा की शुरूआत की, इसके बाद भक्तों की संख्या बढ़ती गई और अब गणेश चतुर्थी के 11 दिनों के अलावा बप्पा के वार बुधवार को भी भक्तों का तांता लगा रहता है।

(Lord Ganesha Temple) बालोद जिला मुख्यालय के मरारापारा में लगभग 70 साल पहले जमीन के भीतर से भगवान गणेश के रूप में प्रगट हुए। सबसे पहले बाफना और श्रीश्रीमाल की नजर पड़ी। बताया जाता है कि पहले बाफना परिवार के किसी सदस्य के सपने में बप्पा आये थे। जिसके बाद दोनों व्यक्तियों ने स्वयं-भू गणपति के चारों ओर टीन शेड लगाकर एक छोटा सा मंदिर बनाया। इसके बाद मंदिर का विस्तार होता गया।

70 सालों से उनके परिवार के सदस्य पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं मरारपारा में बप्पा का छोटा सा मंदिर है लेकिन उसके प्रति लोगों की आस्था अटूट है समय के साथ अब मंदिर का निर्माण बड़े स्तर पर हो चुका है पहले तो केवल दो-चार लोग ही बप्पा की सेवा व पूजा अर्चना करते थे। लेकिन 2008 से नगर के महिला, पुरूष व युवक युवतियों की टोली बनी। जिसे मोरिया मंडल परिवार नाम दिया गया। जिसके बाद से लेकर अब तक मोरिया मंडल परिवार के सदस्यों के साथ नगर के लोग भी गणेश की सेवा व पूजा-अर्चना करते हैं।

स्वयं-भू श्री गणेश का कुछ हिस्सा अब भी जमीन के भीतर

(Lord Ganesha Temple) बता दें कि स्वयं-भू श्री गणेश के घूटने तक का कुछ हिस्सा अभी भी जमीन के भीतर है। लोग बताते हैं कि पहले गणेश जी का आकार काफी छोटा था लेकिन धीरे धीरे बढ़ता गया और आज बप्पा विशाल स्वरूप में हैं। गणपति का आकार लगातार बढ़ता देख भक्तों ने वहां पर मंदिर बनाया है। मंदिर में दूर दराज के लोग अपनी मनोकामना लेकर आते हैं।

भक्तों की मनोकामना हुई पूरी

लोगों का मानना है कि मनोकामना लेकर दर्शन को पहुंचने और सच्ची श्रद्धा विश्वास से पूजा करने पर उनकी इच्छा पूरी होती है। मोरिया मंडल के सदस्य सुनील रतन बोरा ने बताया कि जिले के डौंडी लोहारा विकासखंड के ग्राम कोटेरा निवासी वन विभाग के कर्मचारी गांधी रात्रे का 11 साल से कोई संतान नहीं थी। बड़े-बड़े डॉक्टरों से उपचार के बाद जवाब दे दिया था कि संतान नहीं हो सकता। एक दिन वह सच्ची आस्था के साथ गणेश जी पूजा-अर्चना की और ठीक 11 माह के भीतर एक बच्ची की किलकारी गूंजी।

 

 

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