चन्नी के तेवर बरकरार, बघेल से मिलने पर अड़े शर्तों के साथ: कांग्रेस भवन में बैठक नहीं, वड़िंग की मौजूदगी भी मंजूर नहीं

दिल्ली। पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह अभी थमती नजर नहीं आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल के सामने झुकने से इनकार कर दिया है। चंडीगढ़ में पिछले चार दिनों से डटे भूपेश बघेल से मिलने के बजाय चन्नी ने दो स्पष्ट शर्तें रख दी हैं। माना जा रहा है कि इसी वजह से बघेल का दौरा तीन दिन और बढ़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, चन्नी गुट ने संदेश भेजा है कि बातचीत के लिए उनके सिर्फ दो प्रतिनिधि जाएंगे। साथ ही बैठक कांग्रेस भवन में नहीं होगी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी उसमें मौजूद नहीं रहेंगे। इस बैठक में गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, शुरुआती दिनों में हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करने वाले चन्नी अब पूरी तरह सफल नहीं दिख रहे हैं। दूसरी ओर, राजा वड़िंग लगातार अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में जुटे हैं। भूपेश बघेल भी संगठन को एकजुट रखने के प्रयास में पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि भूपेश बघेल को अब भी उम्मीद है कि दिल्ली लौटने से पहले चन्नी उनसे मुलाकात कर सकते हैं। वहीं, चन्नी के करीबी नेताओं का कहना है कि वे पहले राहुल गांधी से सीधे बातचीत करना चाहते हैं। उनका मानना है कि भविष्य में यदि उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो उस पर अंतिम मुहर राहुल गांधी की ही होनी चाहिए।
इस बीच चन्नी गुट के कुछ नेताओं ने बघेल से मुलाकात भी की है। पूर्व सांसद मोहम्मद सादिक और पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना प्रभारी से मिले, लेकिन चन्नी अब भी दूरी बनाए हुए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि चन्नी सीधे बघेल से मिलने जाते हैं तो इसे उनके बैकफुट पर आने के रूप में देखा जाएगा। वहीं, यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा तो पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।





