नई गाड़ियों में V2V सिस्टम का ड्राफ्ट नियम जारी: गाड़ियां आपस में करेंगी बात, अंधे मोड़ पर पहले ही मिलेगा टक्कर का अलर्ट

नई दिल्ली। सड़क हादसों को कम करने के लिए केंद्र सरकार नई गाड़ियों में एक ऐसी तकनीक अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है, जिससे वाहन आपस में ही जरूरी जानकारी साझा कर सकेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले वाहनों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रस्तावित नियम एल कैटेगरी (दो पहिया वाहन, ई-स्कूटर और ऑटो-रिक्शा), एम कैटेगरी (कार, SUV, टैक्सी और यात्री बस) और एन कैटेगरी (पिकअप, ट्रक और अन्य मालवाहक वाहन) पर लागू होंगे। ड्राफ्ट के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2027 से जिन वाहनों में यह सिस्टम लगाया जाएगा, उन्हें AIS-230 मानक का पालन करना होगा। सरकार ने ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 23 अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
क्या है V2V तकनीक?
V2V एक वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम है। इसके जरिए सड़क पर चल रहे वाहन एक-दूसरे के साथ अपनी लोकेशन, रफ्तार, दिशा और ब्रेकिंग जैसी जानकारी साझा कर सकेंगे। इससे वाहन चालक को आसपास मौजूद दूसरे वाहनों के बारे में पहले से जानकारी मिल सकेगी।
ऐसे काम करेगा सिस्टम
V2V से लैस वाहन लगातार बेसिक सेफ्टी मैसेज (BSM) भेजेंगे। आसपास के वाहन इन संदेशों को रिसीव कर संभावित टक्कर का आकलन करेंगे। खतरा महसूस होने पर ड्राइवर को तुरंत अलर्ट मिलेगा। एडवांस सिस्टम वाली गाड़ियों में जरूरत पड़ने पर ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग भी सक्रिय हो सकती है।
ब्लाइंड स्पॉट और चौराहों पर फायदा
इस तकनीक से अंधे मोड़, चौराहे, धुंध, बड़े वाहनों के पीछे छिपे वाहन और अचानक ब्रेक लगाने जैसी परिस्थितियों में पहले ही चेतावनी मिल सकती है। इससे ब्लाइंड स्पॉट और पीछे से होने वाली टक्कर के हादसे कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, V2V तकनीक के साथ साइबर सुरक्षा, डेटा चोरी और वाहन की लोकेशन ट्रैकिंग जैसी चुनौतियां भी सामने आएंगी। इसलिए तकनीक लागू करने के साथ मजबूत डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी व्यवस्था जरूरी होगी।





