छत्तीसगढ़ में पहली ओपन जेल: 200 कैदियों की क्षमता; खेती-पशुपालन से सुधार की राह

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार ओपन जेल यानी खुली जेल व्यवस्था शुरू होने जा रही है। बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में ओपन जेल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।
इसकी क्षमता 200 सजायाफ्ता कैदियों की होगी। यहां केवल अच्छे आचरण वाले और कम सुरक्षा जोखिम वाले कैदियों को रखा जाएगा।
जेल डीजी हिमांशु गुप्ता के मुताबिक कैदियों के सुधार, व्यवहार में बदलाव और रिहाई के बाद सामान्य जीवन में लौटने की तैयारी के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ ओपन जेल (ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट) रूल्स तैयार किए गए हैं।
काम और जिम्मेदारी से समाज में लौटने की तैयारी
ओपन जेल में पात्र कैदियों को अपेक्षाकृत खुला वातावरण मिलेगा। उन्हें खेती, पशुपालन, जेल उद्योग और अन्य रोजगार आधारित गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इनका उद्देश्य कैदियों को सिर्फ सजा पूरी कराने के बजाय काम, अनुशासन और जिम्मेदारी के जरिए समाज में दोबारा स्थापित होने के लिए तैयार करना है।
गंभीर अपराधों के दोषी नहीं होंगे पात्र
रेप, यौन अपराध, अपहरण, डकैती, लूट, गंभीर चोरी और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को ओपन जेल में नहीं रखा जाएगा। राजद्रोह, राज्य के खिलाफ अपराध और सेना, नौसेना या वायुसेना से जुड़े अपराधों के दोषी भी पात्र नहीं होंगे।
NSA, छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, UAPA, TADA, POTA, POCSO, NDPS और अन्य निर्दिष्ट कानूनों के तहत दोषी कैदियों को भी यह सुविधा नहीं मिलेगी।
कमेटी करेगी चयन
ओपन जेल जाने के लिए कैदी जेल अधीक्षक के माध्यम से आवेदन कर सकेगा। जेल अधीक्षक भी पात्र कैदियों के नाम भेज सकेंगे। हर तीन महीने में पात्र कैदियों की सूची तैयार होगी।
ओपन जेल अधीक्षक जांच के बाद अपनी सिफारिश डीजी जेल एवं करेक्शनल सर्विसेज को भेजेंगे, जिसके बाद समिति अंतिम निर्णय लेगी।
नियम तोड़ा तो सामान्य जेल वापसी
ओपन जेल में किसी अपराध या अनुशासनहीनता पर कैदी को वापस सामान्य जेल भेजा जा सकेगा। मेडिकल कारणों से काम करने में अक्षम होने पर भी मेडिकल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर वापसी हो सकती है।
ओपन जेल के कैदियों को भी निर्धारित नियमों के तहत पैरोल या अस्थायी छुट्टी की सुविधा मिलेगी। कर्मचारियों की पोस्टिंग अलग व्यवस्था के तहत होगी, जबकि उनकी वरिष्ठता मूल कैडर के अनुसार बनी रहेगी।



