वीबी-जीरामजी योजना से दिव्यांगों को मिला सम्मान और रोजगार: 125 दिन काम, 300 रुपए मजदूरी से बढ़ा आत्मविश्वास

रायपुर। विकसित भारत-जीरामजी (ग्रामीण रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन) योजना दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मान का नया माध्यम बन रही है। योजना के तहत अब दिव्यांग हितग्राहियों को 125 दिनों का रोजगार, 300 रुपए प्रतिदिन मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य दिए जा रहे हैं। इससे उनकी आय बढ़ने के साथ आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।
राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुंदरा निवासी दिव्यांग चंद्रप्रकाश साहू को योजना के तहत 100 मजदूरों के लिए मेट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि पहले मनरेगा के अंतर्गत 100 दिनों का रोजगार मिलता था, लेकिन अब 125 दिनों तक काम और 300 रुपए प्रतिदिन मजदूरी मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है। उनका कहना है कि मेट की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए सम्मान की बात है और इससे समाज में नई पहचान मिली है।
चंद्रप्रकाश साहू को राजनांदगांव प्रवास के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव ने शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित भी किया। उन्होंने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हुए कहा कि इस सम्मान ने आगे बेहतर कार्य करने का उत्साह बढ़ाया है।
वहीं, डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम कोहका की दिव्यांग रंभा मंडावी को भी योजना के तहत मेट बनाया गया है। पहले उन्हें मनरेगा में 261 रुपए प्रतिदिन मजदूरी के साथ 100 दिनों का रोजगार मिलता था। अब 125 दिनों तक 300 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी मिलने से उनकी आय में वृद्धि हुई है। वे मेट के रूप में कार्य करने के साथ गांव के लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दे रही हैं।
रंभा मंडावी को भी प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव ने सम्मानित किया। दोनों हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी योजना ने दिव्यांगजनों को सम्मानजनक रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा का नया अवसर प्रदान किया है।





