125 दिन के रोजगार से बढ़ीं ग्रामीणों की उम्मीदें: विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन से मिलेगा आर्थिक संबल

रायपुर। ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार और बेहतर आय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ने गांवों में नई उम्मीद जगा दी है। योजना के तहत अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार की अवधि 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साथ ही मजदूरी दर में भी वृद्धि की गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
मुंगेली जिले के ग्राम लिम्हा निवासी गोमती साहू ने योजना का स्वागत करते हुए कहा कि पहले वर्ष में केवल 100 दिनों का रोजगार मिलने से परिवार की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो जाता था। अब 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलने से आय बढ़ेगी और घरेलू खर्चों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
उन्होंने बताया कि बढ़ी हुई मजदूरी से बच्चों की पढ़ाई, दैनिक जरूरतों और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में काफी राहत मिलेगी। इसके अलावा गांव में ही अधिक समय तक रोजगार उपलब्ध होने से काम की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन भी कम होगा, जिससे परिवार एक साथ रह सकेंगे।
मिशन के तहत केवल रोजगार उपलब्ध कराने पर ही नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। योजना में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों के विकास जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गोमती साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय ग्रामीण परिवारों के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि रोजगार के बढ़ते अवसर, बेहतर आय और गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार से ग्रामीण जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा और गांवों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।





