छत्तीसगढ़ में नशे के बड़े नेटवर्क पर होगा वार, तस्करों की संपत्ति होगी कुर्क

31 दिसंबर तक पुराने जब्त नशीले पदार्थों को नष्ट करने के निर्देश; मेडिकल स्टोरों की भी होगी नियमित जांच
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अब छोटे विक्रेताओं के साथ बड़े तस्करों और उनके आर्थिक नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जाएगी। मादक पदार्थों के उत्पादन से लेकर परिवहन, सप्लाई और बिक्री तक जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच होगी। नशे के कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर नियमानुसार कुर्की और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल केस दर्ज करने और छोटे पैडलरों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। तस्करी के पीछे सक्रिय बड़े कारोबारियों, वित्तीय सहयोगियों और संगठित गिरोहों तक पहुंचना जरूरी है।
गांजा तस्करी से लेकर सूखे नशे तक निगरानी
गृह मंत्री ने गांजा सहित दूसरे मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों की मैपिंग करने को कहा। हर मामले में नशे के स्रोत, परिवहन मार्ग, सप्लायर और स्थानीय विक्रेताओं की पहचान की जाएगी। अवैध कमाई और वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और विधिक विशेषज्ञों को शामिल कर विशेष समिति गठित की जाएगी।
स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशीली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच होगी। प्रतिबंधित दवाएं, नशीले कैप्सूल और नशे में इस्तेमाल होने वाली सिरिंज बेचने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
जब्त नशा और वाहनों पर समयसीमा तय
विजय शर्मा ने निर्देश दिए कि 30 जून 2026 तक जब्त किए गए छह महीने से अधिक पुराने मादक पदार्थों को, जिनकी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, 31 दिसंबर 2026 तक नष्ट किया जाए। नशे की तस्करी में इस्तेमाल वाहनों के राजसातीकरण और नीलामी की प्रक्रिया भी तेज होगी। अगले तीन महीने में अधिक से अधिक पात्र मामलों का निराकरण करने को कहा गया है।
हेल्पलाइन 1933 का होगा प्रचार
गृह मंत्री ने एनडीपीएस मामलों की जांच और अभियोजन समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही नशे के अवैध कारोबार की सूचना देने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1933 का प्रचार करने को कहा।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस-प्रशासन के साथ समाज और युवाओं की भागीदारी भी जरूरी है। अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को नशे से बचाना भी है।





