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धान की जगह दलहन-तिलहन उगाएं किसान, प्रति एकड़ मिलेंगे 15 हजार रुपए

15 नवंबर से धान खरीदी की तैयारी; हर जिले में बनेंगे 2-3 विशेष कृषि मॉडल, अमानक बीज-कीटनाशक बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए धान के साथ दूसरी लाभकारी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी जैसी मिलेट्स फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। धान के बदले निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपए अनुदान देने का प्रावधान है।

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बुधवार को रायपुर संभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि खेती को बाजार की मांग से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।

15 नवंबर से धान खरीदी, तैयारियां समय पर पूरी करें

बैठक में धान खरीदी अभियान की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि 15 नवंबर से शुरू होने वाली खरीदी के लिए सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करें। किसानों को धान बेचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। खाद-बीज के भंडारण और वितरण में पारदर्शिता के लिए साथी पोर्टल का उपयोग करने को भी कहा गया।

अमानक बीज-कीटनाशक बेचने वालों पर कार्रवाई

कृषि आदान विक्रेताओं की मनमानी पर सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। बिना लाइसेंस कीटनाशक बेचने, अमानक उत्पाद देने और किसानों पर जबरन दूसरे उत्पाद खरीदने का दबाव बनाने वालों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।

हर जिले में बनेंगे विशेष कृषि मॉडल

कृषि उत्पादन आयुक्त ने हर जिले में कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल विकसित करने को कहा। बलौदाबाजार जिले के कसडोल क्षेत्र में करीब 700 एकड़ में हो रही ब्लैक राइस की खेती का उदाहरण दिया गया। बैठक में इसके जापानी कंपनी से जुड़े विपणन और 25 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से बिक्री की जानकारी दी गई।

इसके अलावा कृषि यंत्रों के संचालन का प्रशिक्षण देने, उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और चक्रवात से फसल नुकसान होने पर तत्काल सर्वे कर पात्र किसानों को राहत देने के निर्देश दिए गए। पशुपालन, मत्स्यपालन और अन्य कृषि योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

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