बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ को समाज सेवा के लिए मिला देश का सम्मान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण की अलख जगाने वाली समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म ने उन्हें समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल डॉ. ताती की चार दशक लंबी सेवा यात्रा का सम्मान है, बल्कि बस्तर के जनजातीय समाज के संघर्ष और विकास की कहानी को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाता है।
दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली डॉ. बुधरी ताती को स्थानीय लोग प्यार और सम्मान से ‘बड़ी दीदी’ के नाम से जानते हैं। उन्होंने अपना जीवन आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
वर्ष 1986 में उन्होंने बस्तर जिले के बारसूर क्षेत्र को महिला जागरूकता और सशक्तीकरण के केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल की। इसके बाद उन्होंने दूरस्थ और नक्सल प्रभावित गांवों में महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने तथा उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का अभियान शुरू किया।
डॉ. ताती ने पिछले 40 वर्षों में सैकड़ों गांवों तक पहुंचकर स्वास्थ्य जागरूकता, कुपोषण उन्मूलन, नशामुक्ति, बालिका शिक्षा और महिला अधिकारों के लिए लगातार काम किया।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बावजूद जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनकी सेवाओं ने हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।
उनकी पहल से अनेक महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले और कई बालिकाओं को शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला।
समाज सेवा के प्रति इसी समर्पण और अथक प्रयासों के कारण उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। डॉ. बुधरी ताती की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर अंचल के लिए गर्व का विषय बन गई है।





