सिकासार जलाशय का पानी पहले स्थानीय किसानों को दो, फिर बाहर भेजो: किसान संगठन

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के सिकासार जलाशय का पानी महासमुंद जिले के कोड़ार जलाशय तक पहुंचाने की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में विरोध शुरू हो गया है।
किसान संगठनों ने कहा है कि पहले सिकासार जलाशय का पानी स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाए, उसके बाद ही दूसरे जिले में पानी भेजने का निर्णय लिया जाए। इसे लेकर किसान संगठन आंदोलन तेज करने की तैयारी में जुट गए हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि सिकासार जलाशय का निर्माण क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा देने और कृषि विकास के उद्देश्य से किया गया था। इसके बावजूद आज भी आसपास के कई गांवों तक नहरों का विस्तार नहीं हो पाया है। इससे बड़ी संख्या में किसान पर्याप्त सिंचाई सुविधा से वंचित हैं और खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है।
किसानों का आरोप है कि स्थानीय जरूरतें पूरी किए बिना जलाशय का पानी दूसरे जिले में भेजने का फैसला उचित नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों से वे सिंचाई व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
इस मुद्दे को लेकर किसान संगठन पहले भी जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर स्थानीय किसानों को प्राथमिकता देने की मांग भी कर चुका है।
इसी कड़ी में किसान संगठन के पदाधिकारियों ने सिकासार जलाशय और आसपास के प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि जल्द सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
किसानों ने प्रशासन से स्थानीय कृषि जरूरतों को प्राथमिकता देने और नहर विस्तार का कार्य जल्द पूरा करने की मांग की है।
फिलहाल सिकासार जलाशय के पानी को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच खींचतान जारी है। अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी है कि पहले स्थानीय किसानों की वर्षों पुरानी सिंचाई की मांग पूरी होती है या फिर कोड़ार जलाशय तक पानी पहुंचाने की योजना आगे बढ़ाई जाती है।





