बिहान से बदली पुष्पा राजवाड़े की जिंदगी, ट्रैक्टर खरीदकर बनीं लखपति दीदी

टेंट व्यवसाय से शुरू किया सफर; समूह से ऋण लेकर खरीदा ट्रैक्टर, खेती के साथ किराए से भी हो रही अतिरिक्त आमदनी
रायपुर। कभी घरेलू कामकाज और पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली सरगुजा जिले की पुष्पा राजवाड़े आज लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने नियमित बचत शुरू की और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से टेंट व्यवसाय शुरू किया। कारोबार से आत्मविश्वास बढ़ा तो समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा। अब ट्रैक्टर से परिवार की खेती आसान होने के साथ किराए पर देकर अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।
ग्राम पंचायत मेंड्रा खुर्द निवासी पुष्पा जय श्री शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं और समूह में लेखापाल की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। बिहान से जुड़ने से पहले उनका अधिकांश समय घर और खेती-किसानी में बीतता था। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत के साथ स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। इसी के बाद उन्होंने टेंट व्यवसाय शुरू किया।
समूह से ऋण लेकर खरीदा ट्रैक्टर
पुष्पा के परिवार में पहले हल से खेती की जाती थी। जुताई समेत कृषि कार्यों में ज्यादा समय और मेहनत लगती थी। कई बार समय पर काम पूरा करना भी मुश्किल होता था। इसे देखते हुए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा।
ट्रैक्टर मिलने के बाद खेती के काम आसान हुए और समय व श्रम की बचत होने लगी। परिवार अपनी खेती के अलावा ट्रैक्टर को दूसरे किसानों को किराए पर भी देता है। इससे अतिरिक्त आय का जरिया तैयार हुआ है।
टेंट से लेकर मछली पालन तक बढ़ाए आय के साधन
पुष्पा ने अपनी आजीविका को एक व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। टेंट व्यवसाय, खेती और ट्रैक्टर से आमदनी बढ़ाने के साथ वे मछली पालन और बागवानी से भी जुड़ी हैं। उनका स्वयं सहायता समूह मानसरोवर तालाब में मछली पालन का काम कर रहा है।
बिहान से मिली बचत, ऋण और स्वरोजगार के अवसरों का उपयोग कर पुष्पा ने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है। आज वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। उनका सफर ग्रामीण महिलाओं के लिए मिसाल है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत, ऋण और मेहनत के जरिए आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।





