पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन: 70 की उम्र में ली अंतिम सांस, सीएम साय ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोककला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। उन्होंने रात 3:15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली।
वे पिछले कुछ समय से बीमार थीं और 27 मई से अस्पताल में भर्ती थीं। रविवार सुबह उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। सीएम साय ने एम्स पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, अभिनय और अनूठी कापालिक शैली से पंडवानी को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई।
महाभारत की कथाएं सुनाने की प्रेरणा उन्हें अपने नाना ब्रजलाल से मिली थी। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी और बाद में पुरुषों तक सीमित मानी जाने वाली कापालिक शैली में पंडवानी प्रस्तुत करने वाली पहली महिला बनीं।

24 अप्रैल 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा। पारधी समुदाय से होने के कारण उन्हें सामाजिक विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने गायन नहीं छोड़ा।
वे कभी नियमित रूप से स्कूल नहीं जा सकीं, फिर भी अपनी कला के दम पर उन्हें चार बार डी.लिट. की मानद उपाधि मिली। देश ने उनके योगदान को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई और उनका जाना कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उन्होंने पंडवानी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाया। तीजन बाई के निधन से लोककला जगत ने अपनी सबसे सशक्त और प्रेरणादायी आवाज खो दी है।



