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5 महीनों में महंगा हुआ रसोई का बजट: दाल, तेल, दूध और चीनी के बढ़े दाम, त्योहारी सीजन में और बढ़ सकती हैं कीमतें

दिल्ली। पिछले पांच महीनों में आम आदमी की रसोई का बजट लगातार बढ़ा है। 28 फरवरी से 3 अगस्त 2026 के बीच देश में रोजमर्रा की अधिकांश खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार 16 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं। सबसे अधिक महंगाई दालों और खाद्य तेलों में देखने को मिली है।

आंकड़ों के मुताबिक, चना दाल 4.65 रुपए प्रति किलो, अरहर दाल 5.96 रुपए, उड़द दाल 5.71 रुपए और मूंग दाल 4.55 रुपए प्रति किलो महंगी हुई है। वहीं सरसों तेल की कीमत में 7.56 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इसके अलावा दूध 3 रुपए प्रति लीटर और चीनी 2.25 रुपए प्रति किलो महंगी हुई है। चावल के दाम 1.57 रुपए और नमक 0.85 रुपए प्रति किलो बढ़े, जबकि आटे की कीमत में केवल 22 पैसे प्रति किलो की मामूली बढ़ोतरी हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार दालों की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कमजोर और असमान मानसून है।

जुलाई के अंत तक खरीफ दालों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में करीब 7 प्रतिशत कम रही, जिससे उत्पादन घटने और आयात बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

दूसरी ओर, खाद्य तेलों की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, आयात लागत और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर पड़ा है।

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि गेहूं का पर्याप्त सरकारी भंडार होने से आटे की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगस्त से शुरू होने वाले रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान खाद्य तेल और दालों की मांग बढ़ेगी।

यदि वैश्विक बाजार में कीमतों और आयात लागत में राहत नहीं मिली, तो आने वाले महीनों में रसोई का बजट और बढ़ सकता है।

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