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मानसून से पहले अलर्ट मोड पर सरकार: मुख्य सचिव ने ली बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक, 1 जून से रोजाना मॉनिटरिंग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी मानसून और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक हुई। बैठक में सभी विभागों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को 1 जून से प्रतिदिन बारिश और उससे होने वाली संभावित क्षति की रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रत्येक जिले में बाढ़ नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तत्काल पूरी करने को कहा गया है।

बैठक में बताया गया कि राज्य और जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए गए हैं। संवेदनशील और पहुंचविहीन क्षेत्रों में राशन, नमक, केरोसिन और जीवन रक्षक दवाओं का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ संभावित इलाकों के लिए विशेष मेडिकल टीम तैयार रखने को कहा गया है।

जल संसाधन विभाग और नगर सेना को हर साल बाढ़ प्रभावित होने वाले निचले इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। बड़े बांधों का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पानी छोड़े जाने से कम से कम 12 घंटे पहले निचले जिलों और पड़ोसी राज्यों को अलर्ट जारी करना अनिवार्य किया गया है।

लोक निर्माण विभाग को जर्जर पुल-पुलियों और सरकारी भवनों की मरम्मत कराने, जबकि नगरीय निकायों को नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र को किसानों तक मौसम की चेतावनी मोबाइल ऐप के जरिए पहुंचाने को कहा गया है।

मुख्य सचिव ने जर्जर भवनों की निगरानी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने पर भी जोर दिया। सरकार का लक्ष्य मानसून के दौरान जनहानि को शून्य रखना है।

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