बंगाल-महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु पर भाजपा की नजर: 850 सीटों वाली संसद के लिए सियासी गणित तेज, दो-तिहाई बहुमत जुटाने की तैयारी

नई दिल्ली/मुंबई। संसद में संख्या बल बढ़ाने की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु को भाजपा की नजरों में अगला बड़ा सियासी मैदान माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार की कोशिश लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की है, ताकि परिसीमन, महिला आरक्षण और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों को आगे बढ़ाया जा सके।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले समय में कुछ विपक्षी दलों के सांसद पाला बदल सकते हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों के नामों की भी चर्चा है। भाजपा का लक्ष्य लोकसभा में अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ संख्या बढ़ाकर संवैधानिक संशोधनों के लिए जरूरी समर्थन हासिल करना बताया जा रहा है।
दरअसल, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर करीब 850 करने से जुड़े प्रस्ताव पर पिछली बार पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था। इसके बाद भाजपा ने संसद में संख्या बल मजबूत करने की रणनीति पर काम शुरू किया है। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि यदि सरकार दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचती है तो विशेष सत्र बुलाकर भी महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने की कोशिश की जा सकती है।
शिवसेना (UBT) में फिर टूट की आहट
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) के सामने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के अलग होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट के साथ जाने का फैसला किया है।
यदि 9 में से 6 सांसद अलग गुट बनाते हैं तो दल-बदल कानून के तहत उन्हें दो-तिहाई समर्थन का लाभ मिल सकता है। हालांकि, आगे की कानूनी प्रक्रिया और विलय को लेकर फैसला लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर होगा।
शिवसेना (UBT) ने इस घटनाक्रम के बीच अपने सभी सांसदों की बैठक बुलाई है। पार्टी नेतृत्व ने सांसदों को अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाए आरोप
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के सांसदों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करती है। उन्होंने इसे लोकसभा में परिसीमन विधेयक को समर्थन नहीं मिलने के बाद की राजनीतिक रणनीति बताया।
फिलहाल भाजपा की नजर दक्षिण भारत के राजनीतिक समीकरणों पर भी है। तमिलनाडु में सियासी विस्तार की कोशिशों के बीच आने वाले मानसून सत्र में संसद की राजनीति और ज्यादा गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।





