शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: विरोध के चलते पद छोड़ने वाले 12 साल में पहले मंत्री, दीपके बोले- झुकती है दुनिया

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले को लेकर लगातार बढ़ते विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना दे रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही थी। इस्तीफे के बाद संगठन के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा, “कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के साथ दो पन्नों का पत्र भी जारी किया। करीब 575 शब्दों की इस चिट्ठी में उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए दो जगह यह भी लिखा कि युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया गया।
प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में विरोध के दबाव के बाद पद छोड़ने वाले पहले केंद्रीय मंत्री के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने ‘मी टू’ आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था।
इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया। अभिजीत दीपके घुटनों के बल बैठ गए और समर्थकों के साथ जीत का उत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उनकी दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं—पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा और आंदोलन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर एक्शन।
इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इसे लोकतंत्र और शांतिपूर्ण जनआंदोलन की जीत बताया। वहीं, शुक्रवार को केंद्र सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की थी।
गौरतलब है कि 2024 में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए नया कानून लागू किया था, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को गैर-जमानती अपराध घोषित करते हुए कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।





