कांकेर में मलेरिया के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग अलर्ट: दो बच्चों की मौत के बाद जांच-उपचार तेज; आश्रम में 46 बच्चों की स्क्रीनिंग

रायपुर/कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले में मलेरिया से दो बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच, उपचार और निगरानी की जानकारी साझा की है। विभाग के मुताबिक दोनों मामलों में बच्चों की जांच और उपचार किया गया था।
संबंधित इलाकों में 22 जुलाई को चलाए गए मलेरिया मुक्त अभियान के दौरान भी जांच की गई थी, जिसमें संबंधित क्षेत्रों में रिपोर्ट निगेटिव मिली थी।
आश्रम में 46 बच्चों की जांच
पहला मामला कोंडागांव जिले के डुडेरापाल निवासी 10 वर्षीय सुभाष कुमेटी का है। वह बालक आश्रम मर्दापोटी में रहकर पढ़ाई कर रहा था।
21 जुलाई को तबीयत खराब होने पर उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां आरडी किट से जांच में पीएफआर पॉजिटिव मिला। उसे एसीटी और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी गई।
22 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आश्रम के 46 बच्चों की जांच की। इनमें दो अन्य बच्चे भी पीएफआर पॉजिटिव पाए गए, जिन्हें मलेरिया की दवा दी गई। सुभाष की जांच उस दौरान निगेटिव आई थी।
24 जुलाई को दोबारा जांच में वह पॉजिटिव मिला। उपचार के बाद 25 जुलाई को परिजन उसे गांव ले गए। तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज कांकेर में भर्ती कराया गया, जहां 26 जुलाई सुबह उसकी मौत हो गई।
तीन बहनों को मलेरिया, एक की मौत
दूसरा मामला कांकेर के डोमाहर्रा का है। 23 जुलाई को रवीना (11), सलीना (5) और करीना (9) को बुखार के बाद जांच के लिए लाया गया।
तीनों पीएफआर पॉजिटिव मिलीं। उन्हें एसीटी और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी गई। बाद में तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीना की तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज कांकेर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बुखार के मरीजों की तत्काल जांच, उपचार और जरूरत पड़ने पर रेफरल की कार्रवाई लगातार जारी है। संबंधित क्षेत्रों में निगरानी भी बढ़ाई गई है।





