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नीला ड्रम हत्याकांड: साहिल-मुस्कान को कैदी नंबर 395 और 396, फांसी की सजा के बाद बदली पहचान

मेरठ। चर्चित मेरठ हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला कारागार में अब दोनों की पहचान उनके नाम के बजाय कैदी नंबर 395 और 396 से होगी। जेल प्रशासन ने दोनों की बैरक बदल दी है। साथ ही उन्हें सेंट्रल जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।

जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने बुधवार शाम करीब 4:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले में फैसला सुनाया। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, मृत्युदंड का फैसला सुनते ही साहिल और मुस्कान भावुक होकर रोने लगे। दोनों को उम्मीद थी कि अदालत उन्हें उम्रकैद की सजा सुना सकती है, लेकिन फैसले से वे विचलित हो गए।

रात में नहीं खाया खाना, बच्ची की देखभाल की व्यवस्था

दोनों की स्थिति को देखते हुए जेलकर्मियों ने उनकी काउंसलिंग कराई। इस दौरान मुस्कान की गोद में मौजूद बच्ची को उससे अलग कर देखभाल की व्यवस्था की गई। जेल प्रशासन के मुताबिक, दोनों ने बुधवार रात खाना नहीं खाया। मुस्कान जेल में नवरात्रि की पूजा भी कर रही थी। बच्ची को दूध पिलाने में जेल की अन्य महिला बंदियों ने मदद की।

165 पन्नों का फैसला, हाईकोर्ट में अपील करेंगे

अदालत ने मामले में 165 पन्नों का फैसला सुनाया है। इससे पहले पुलिस ने जांच के बाद करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। फैसले के बाद अब साहिल और मुस्कान के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं।

जेल प्रशासन ने दोनों को बताया कि वे निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया जा सकता है। दोनों ने हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है। नियमानुसार, जरूरत पड़ने पर जेल प्रशासन की ओर से वकील उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

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