वर्ल्ड स्पाइन डे: बदलती लाइफस्टाइल से बढ़ रहा कमर-गर्दन दर्द, अस्पताल में 30-35% मरीज रीढ़ की समस्या वाले

घंटों बैठकर काम करना और व्यायाम की कमी प्रमुख वजह; 95-97% मामलों में बिना ऑपरेशन इलाज संभव
रायपुर। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने से कमर और गर्दन दर्द की समस्या बढ़ रही है। स्लिप डिस्क, रीढ़ की हड्डी खिसकने और स्पाइन टीबी जैसी बीमारियों के मरीज भी सामने आ रहे हैं।
अंबेडकर अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग में रोज पहुंचने वाले मरीजों में करीब 30 से 35 प्रतिशत रीढ़ से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित होते हैं। वर्ल्ड स्पाइन डे के मौके पर विशेषज्ञों ने रीढ़ की सेहत को लेकर जागरूक रहने की सलाह दी है।
लगातार दर्द और बुखार को न करें नजरअंदाज
अंबेडकर अस्पताल के आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र अहिरे के मुताबिक, सामान्य कमर दर्द में 7 से 10 दिन में सुधार हो सकता है। लेकिन दर्द लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ बार-बार बुखार आए तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण स्पाइन टीबी जैसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। समय पर पहचान और इलाज से जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
95 से 97% मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, रीढ़ से जुड़ी 95 से 97 प्रतिशत समस्याओं का इलाज बिना ऑपरेशन संभव है। इसके लिए दवाइयों, फिजियोथेरेपी और चुनिंदा मामलों में विशेष इंजेक्शन की मदद ली जाती है।
स्लिप डिस्क, साइटिका और स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं में मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार तय किया जाता है। जरूरत पड़ने पर सर्जरी की जाती है। इसलिए लकवे के डर से इलाज टालना उचित नहीं है।
व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या जरूरी
लंबे समय तक बैठे रहने, व्यायाम नहीं करने और विटामिन डी व कैल्शियम की कमी से हड्डियों की सेहत प्रभावित हो सकती है। रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम करें, काम के बीच छोटे ब्रेक लें और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचें।
हाथ-पैरों में सुन्नपन, कमजोरी, चलने में परेशानी या पेशाब-मल पर नियंत्रण में अचानक बदलाव होने पर तत्काल चिकित्सकीय मदद लें। लगातार दर्द होने पर खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।





