बस्तर से 15 आंगादेव लेकर डोंगरगढ़ पहुंचा आदिवासी समाज, शांतिपूर्ण हुई पंचमी भेंट

विवाद के बाद प्रशासन की पहल से बनी सहमति; बूढ़ादेव गुफा से मां बम्लेश्वरी मंदिर तक निकली यात्रा, भाईचारे का दिया संदेश
खैरागढ़। डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी मंदिर की पंचमी भेंट इस बार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। बस्तर से 15 आंगादेव और मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग लेकर पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। खैरागढ़ राजपरिवार, गोंड समाज और मंदिर ट्रस्ट समिति के बीच समन्वय के साथ आयोजन हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
पिछले आयोजनों में पूजा पद्धति और मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर मतभेद सामने आए थे। इस बार जिला प्रशासन और पुलिस ने तीनों पक्षों से बातचीत कर सहमति बनाई। इसके बाद धार्मिक परंपरा का निर्वहन शांतिपूर्ण ढंग से किया गया।
लाल निवास से शुरू हुई यात्रा
पंचमी भेंट यात्रा गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे डोंगरगढ़ स्थित खैरागढ़ राजपरिवार के राजमहल लाल निवास से शुरू हुई। यहां आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक पूजा-पाठ किया। इसके बाद शहर के अलग-अलग देवी-देवताओं के स्थानों पर पूजा-अर्चना की गई। बस्तर से लाए गए आंगादेव का स्वागत भी किया गया।
यात्रा छीरपानी स्थित प्राचीन बूढ़ादेव गुफा पहुंची। यहां पूजा के बाद श्रद्धालु मेला ग्राउंड होते हुए नीचे स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर के प्रांगण पहुंचे। मंदिर ट्रस्ट समिति ने यात्रा का स्वागत किया।
परंपरा और संस्कृति से जुड़ा आयोजन
गोंड समाज के लिए पंचमी भेंट धार्मिक आस्था के साथ पूर्वजों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर है। आंगादेव और डांग का विशेष धार्मिक महत्व है। इनके माध्यम से समाज अपनी मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है।
मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों का स्वागत किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। इस बार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई पंचमी भेंट ने आपसी भाईचारे, संवाद और मिल-जुलकर परंपराओं का निर्वहन करने का संदेश दिया।





