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आदिवासी क्षेत्रों के 3,189 विकास कार्यों को मंजूरी, 246.54 करोड़ रुपए होंगे खर्च

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए राज्य स्तरीय कार्यसमिति की बैठक में 3,189 प्राथमिक कार्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन कार्यों पर कुल 246 करोड़ 54 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत गठित राज्य स्तरीय कार्यसमिति की बैठक बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई।

बैठक में जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, रोजगार और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े प्रस्तावों का परीक्षण किया गया। जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों से मिले प्रस्तावों पर चर्चा के बाद प्राथमिकता वाले कार्यों को अंतिम रूप दिया गया।

कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में 185 पालना-घर

बैठक में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह वाले कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में 185 कम्युनिटी मैनेज्ड क्रेच यानी पालना-घर स्थापित करने और उनके संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इससे छोटे बच्चों की देखभाल और पोषण संबंधी सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बहुभाषी शिक्षा और धरोहर संरक्षण पर जोर

जनजातीय क्षेत्रों के पवित्र सामाजिक-सांस्कृतिक स्थलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए पायलट प्रोजेक्ट को भी मंजूरी मिली। इसके अलावा प्राथमिक स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए दो वर्षों के लिए बहुभाषी शिक्षण-अधिगम सामग्री विकसित की जाएगी।

बैठक में बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा, पेयजल, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, ग्राम एवं समुदाय विकास, खेलकूद, पशुपालन और आय सृजन से जुड़ी योजनाओं पर भी निर्णय लिया गया।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों का क्रियान्वयन गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ जनजातीय क्षेत्रों में अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। बैठक में विभिन्न विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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