छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा बड़ा मंच, वार्षिक आयोजनों के लिए कलाकारों से आवेदन आमंत्रित

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं शास्त्रीय कला परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय ने वर्ष 2026-27 के वार्षिक सांस्कृतिक आयोजनों हेतु कलाकारों और सांस्कृतिक दलों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक कलाकार 15 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। विभाग का उद्देश्य प्रदेश की लोक-सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का बेहतर मंच उपलब्ध कराना है।
संस्कृति विभाग हर वर्ष प्रदेशभर में शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, लोकसंगीत, लोकनृत्य, नाट्य प्रस्तुतियों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता है। इस बार पावस प्रसंग, रंगतरंग वाद्ययंत्र संगम, रंगपरब नाट्य श्रृंखला और लोकरंग पर्व के लिए कलाकारों का चयन किया जाएगा।
लोकरंग पर्व में विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं से जुड़े कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा, गम्मत, सुआ, करमा, पंथी, बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत, संस्कार गायन और अन्य लोक विधाओं में दक्ष कलाकार आवेदन कर सकते हैं। विभाग का मानना है कि ऐसे आयोजनों से विलुप्त होती लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को नई गति मिलेगी।
आवेदन करने वाले कलाकारों और सांस्कृतिक दलों का चिन्हारी पंजीकरण होना अनिवार्य है। समूह प्रस्तुतियों के लिए भी निर्धारित प्रारूप में आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, द्वितीय तल, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल व्यवसायिक परिसर, सेक्टर-27, नवा रायपुर स्थित कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। इसके अलावा ई-मेल के माध्यम से भी आवेदन भेजने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
संस्कृति विभाग ने सभी पात्र कलाकारों और सांस्कृतिक दलों से 15 जुलाई तक आवेदन करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि इन आयोजनों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, साथ ही स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी प्राप्त होगा।





