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मणिपुर हिंसा के 3 साल: बदला सिर्फ CM, नहीं बदले हालात; 2029 तक उग्रवाद खत्म करने की तैयारी

दिल्ली। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा को तीन साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं।

37 लाख आबादी वाले इस छोटे राज्य में आज भी दोनों समुदायों के बीच डर और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। राज्य में 50 से ज्यादा उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं और आए दिन गोलीबारी व हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं।

केंद्र सरकार अब पूर्वोत्तर में उग्रवाद खत्म करने के लिए बड़ा अभियान तैयार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक नक्सलवाद पर नियंत्रण के बाद अब सबसे ज्यादा फोकस मणिपुर पर है।

सरकार ने 2029 तक उग्रवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया है। इसकी शुरुआत अमरनाथ यात्रा के बाद हो सकती है।

योजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों को मणिपुर और पूर्वोत्तर के अन्य संवेदनशील राज्यों में भेजने की तैयारी है। सरकार पहले उग्रवादी संगठनों से बातचीत करेगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर आक्रामक कार्रवाई भी की जाएगी।

इस बीच 7 अप्रैल को ट्रोंगलाओबी गांव में बम धमाके में मारे गए दो बच्चों का अंतिम संस्कार 25 दिन बाद किया गया। परिवार ने कहा कि उन्हें मुआवजा या नौकरी नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।

3 मई 2023 से शुरू हुई हिंसा के बाद राज्य दो हिस्सों में बंट गया है। मैतेई समुदाय इंफाल घाटी से पहाड़ी इलाकों में नहीं जा पा रहा, जबकि कुकी समुदाय घाटी में आने से डरता है। करीब 60 हजार लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

राज्य में मुख्यमंत्री बदल चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। हिंसा में अब तक 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI, NIA और न्यायिक पैनल अलग-अलग मामलों की जांच कर रहे हैं।

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