स्वरोजगार की राह पर बढ़ते कदम: RSETI में दिखा ग्रामीण सशक्तिकरण का मॉडल, ‘पशु सखियों’ से मिले मुख्यमंत्री

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव सायव ने सुशासन तिहार के तहत बलरामपुर प्रवास के दौरान ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) का दौरा किया। यहां उन्होंने प्रशिक्षण ले रही ‘पशु सखियों’ और युवाओं से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण कक्ष का निरीक्षण करते हुए विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली और “जय बिहान” कहकर सभी का अभिवादन किया। उन्होंने विशेष रूप से पशुपालन का प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से बातचीत कर उनके अनुभव सुने और उनके प्रयासों की सराहना की।
ग्राम केवली की अनुराधा गुप्ता ने बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर ‘पशु सखी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। वे गांव में पशुओं का सर्वे करती हैं, पशु चिकित्सकों को सहयोग देती हैं और ग्रामीणों को पशुपालन से जुड़ी जानकारी व बीमारियों के प्रति जागरूक करती हैं। उन्होंने कहा कि RSETI से मिले प्रशिक्षण ने उनके काम को और अधिक प्रभावी बना दिया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि RSETI जैसे संस्थान केवल प्रशिक्षण केंद्र ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रभावी माध्यम भी हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए महिलाएं और युवा अपने गांव में ही रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं, जिससे पलायन में भी कमी आ रही है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
उल्लेखनीय है कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में RSETI के माध्यम से अब तक 16 बैचों में 510 प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन कार्यक्रमों से युवाओं और महिलाओं को सूक्ष्म उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ऐसे प्रयास छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





