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प्लॉट की बुकिंग रद्द कर राशि रोकना पड़ा महंगा, CGRERA ने 33.70 लाख लौटाने का आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने आबंटी के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। सेजबहार, रायपुर के प्रमोटर वत्सल्य डेवलपर्स को प्लॉट की बुकिंग के लिए जमा रकम ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया गया है।

प्राधिकरण ने 15 लाख 9 हजार 300 रुपए मूल राशि और 18 लाख 60 हजार 956 रुपए ब्याज समेत कुल 33 लाख 70 हजार 256 रुपए भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

प्रकरण के मुताबिक आबंटी ने वर्ष 2012 में प्रमोटर के साथ अनुबंध कर आवासीय प्लॉट बुक किया था। अनुबंध के तहत 2012 से 2015 के बीच आबंटी ने प्लॉट के लिए कुल 15 लाख 9 हजार 300 रुपए का भुगतान कर दिया। इसके बावजूद प्रमोटर ने प्लॉट का कब्जा नहीं दिया।

बिना सूचना बुकिंग कर दी थी निरस्त

आबंटी की ओर से पूरी राशि का भुगतान किए जाने के बाद भी प्लॉट का कब्जा नहीं मिलने की स्थिति बनी रही। इसी दौरान प्रमोटर ने बिना किसी पूर्व सूचना के आबंटी की बुकिंग भी निरस्त कर दी। इससे परेशान आबंटी ने जमा रकम वापस लेने और अपने हितों की सुरक्षा के लिए CGRERA में आवेदन प्रस्तुत किया।

प्राधिकरण ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच की। सुनवाई के बाद आबंटी के पक्ष में फैसला देते हुए प्रमोटर को मूल राशि के साथ ब्याज का भुगतान करने के निर्देश दिए गए। इसके तहत 15.09 लाख रुपए मूलधन और 18.60 लाख रुपए ब्याज मिलाकर कुल 33.70 लाख रुपए लौटाने होंगे।

अनुबंध और वैधानिक दायित्वों का पालन जरूरी

CGRERA के इस आदेश से रियल एस्टेट परियोजनाओं में आबंटियों के अधिकारों को मजबूती मिली है। आदेश से स्पष्ट है कि प्रमोटरों को आबंटियों के साथ किए गए अनुबंध और वैधानिक दायित्वों का पालन करना होगा। राशि लेने के बाद प्लॉट का कब्जा नहीं देना या बिना सूचना बुकिंग निरस्त करना आबंटी के हितों के प्रतिकूल है। ऐसी स्थिति में आबंटी कानून के तहत राहत के लिए प्राधिकरण की शरण ले सकता है।

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