SIR पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने दी चुनौती

चुनाव आयोग ने एक दिन पहले दाखिल किया हलफनामा; कहा- फॉर्म-6 में नहीं किया कोई बदलाव, डिक्लेरेशन अलग दस्तावेज
दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में आज, 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी। राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि इस प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए, चुनाव आयोग के फैसलों की जांच हो और संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।
इससे पहले 15 अक्टूबर को मामले में पहली सुनवाई हुई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने इन याचिकाओं को SIR से संबंधित लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश भी दिया था।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?
विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई से एक दिन पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। आयोग ने कहा कि SIR के फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उसके मुताबिक, ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित फॉर्म में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की इन फैसलों पर सहमति थी। हलफनामे पर तीनों के हस्ताक्षर हैं।
फॉर्म-6 में बदलाव की रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद
विवाद मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फॉर्म-6 में बदलाव की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों को नहीं दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने कथित बदलाव पर आपत्ति जताई थी।
बदलाव के तहत आवेदकों से खुद को या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली SIR से जोड़ने वाली जानकारी देने को कहा गया था। चुनाव आयोग ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर जानकारी दिखाने के तरीके से फॉर्म-6 में बदलाव होने का आभास हो सकता था।
हालांकि, आयोग का कहना है कि SIR के दौरान मांगा गया डिक्लेरेशन अलग दस्तावेज है, इसे फॉर्म-6 में संशोधन नहीं माना जा सकता। आयोग ने याचिका के आधार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अखबार की रिपोर्ट अपने आप में कानूनी सबूत नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इस विवाद से जुड़े मुद्दों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।





