सौरभ चंद्राकर ने ओमान की अदालत में खुद को बताया वानुआतु का नागरिक: दावा- 2020 में छोड़ी थी भारतीय नागरिकता, प्रत्यर्पण के दौरान दी थी जानकारी

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर ने ओमान की अदालत में खुद को वानुआतु देश का नागरिक बताया था। उसने दावा किया था कि वह 2020 में ही भारतीय नागरिकता छोड़ चुका है और इसके लिए भारतीय दूतावास में निर्धारित प्रक्रिया भी पूरी की थी। हालांकि, उसके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह जानकारी ओमान में उसके प्रत्यर्पण से जुड़ी कानूनी कार्यवाही के दौरान सामने आई। भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद 2 नवंबर को CBI ने सौरभ को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। एजेंसी ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अब उसे 4 नवंबर तक रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा।
गिरफ्तारी को अवैध बताकर बचाव पक्ष ने दी दलील
सुनवाई के दौरान सौरभ के वकीलों ने उसकी गिरफ्तारी को अवैध बताया। बचाव पक्ष का कहना था कि ओमान की अदालत ने ED के मामले में प्रत्यर्पण की अनुमति दी थी, जबकि CBI के अनुरोध को मंजूरी नहीं दी गई थी। वकीलों ने प्रत्यर्पण आदेश की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि सौरभ पर उन्हीं अपराधों के लिए कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है। इसके लिए एक्सट्रैडिशन एक्ट की धारा 21 का भी उल्लेख किया गया।
CBI ने वारंट और प्रत्यर्पण प्रक्रिया का दिया हवाला
CBI ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी था। एजेंसी ने बचाव पक्ष की ओर से पेश ओमान की अदालत के आदेश की प्रति को प्रमाणित नहीं माना। CBI का कहना था कि उसका मामला मूल अपराध से जुड़ा है और ED की जांच भी इसी अनुसूचित अपराध से संबंधित है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उसके सामने ट्रांजिट रिमांड का मामला है। प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत CBI मामले में मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं, इसका फैसला रायपुर की संबंधित विशेष अदालत करेगी।
फर्जी यात्रा दस्तावेजों से ओमान में प्रवेश का आरोप
अदालती आदेश के मुताबिक, सौरभ को ओमान में कथित फर्जी यात्रा दस्तावेजों के आधार पर अवैध प्रवेश के आरोप में हिरासत में लिया गया था। CBI ने उसे 1 नवंबर को शाम 7:35 बजे गिरफ्तार किया।
गौरतलब है कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल पर महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए देशभर में सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाने का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पैनल और ब्रांच ऑपरेटरों के जरिए यह नेटवर्क संचालित होता था और अवैध कमाई विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से विदेश भेजी जाती थी। अब रायपुर कोर्ट में उसकी पेशी के दौरान प्रत्यर्पण की शर्तों और दर्ज मामलों पर आगे कानूनी प्रक्रिया तय होगी।





