देवभोग हीरा परियोजना को गति देने की तैयारी, हाईकोर्ट में अर्जेंट हियरिंग चाहती है राज्य सरकार

रायपुर। गरियाबंद जिले के देवभोग-मैनपुर क्षेत्र में स्थित बहुप्रतीक्षित हीरा खदान परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने कानूनी प्रयास तेज कर दिए हैं। करीब 23 वर्षों से न्यायालय में लंबित इस मामले में अब सरकार बिलासपुर हाईकोर्ट में अर्जेंट हियरिंग (त्वरित सुनवाई) की मांग करने जा रही है। उद्देश्य कानूनी अड़चनें दूर कर जल्द से जल्द व्यावसायिक हीरा उत्खनन शुरू करना है।
भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल ने बताया कि सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर है। हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण की शीघ्र सुनवाई के लिए याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मैनपुर-देवभोग क्षेत्र में हीरों के विशाल भंडार की पुष्टि करीब 36 वर्ष पहले हो चुकी थी, लेकिन कानूनी विवादों के कारण परियोजना अब तक शुरू नहीं हो सकी।
1999 में मिला था सर्वे का अधिकार
वर्ष 1999 में अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार ने मुंबई की बी. विजय कुमार एंड कंपनी को 4,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हीरा खोज के लिए पूर्वेक्षण की अनुमति दी थी। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय हीरा कंपनी डी बियर्स के साथ मिलकर सर्वे शुरू किया। हालांकि वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार ने अनुबंध उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अनुमति रद्द कर दी, जिसके बाद मामला माइंस ट्रिब्यूनल से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
अवैध खनन पर भी लगेगा अंकुश
पायलीखंड, बेहराडीह, कोदोमाली और जांगड़ा क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली किम्बरलाइट चट्टानों की मौजूदगी ने दुनिया की कई खनन कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया है। लंबे समय तक खनन शुरू नहीं होने से यह इलाका अवैध उत्खनन और तस्करी के खतरे से भी जूझ रहा है।
हालिया भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण और महासमुंद में 200 टन बल्क सैंपल परीक्षण के दौरान जेम्स श्रेणी के पांच हीरे मिलने से इस बेल्ट की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। सरकार का मानना है कि यदि व्यावसायिक खनन शुरू होता है तो राज्य को बड़ा राजस्व मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और छत्तीसगढ़ वैश्विक हीरा उद्योग के मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।





