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छत्तीसगढ़ में पर्यटन पर 1500 करोड़ खर्च करने की योजना, चित्रकोट-मैनपाट समेत 5 जगहों का होगा विकास

500 करोड़ की मिशन निधि प्रस्तावित, 1,000 पर्यटन उद्यमी तैयार होंगे; 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन शुरू करने की योजना है। इसके तहत 500 करोड़ रुपए की मिशन निधि प्रस्तावित है। वहीं, केंद्र सरकार की योजनाओं, निजी निवेश, सीएसआर और अन्य स्रोतों से 1,000 करोड़ रुपए से अधिक जुटाने की कार्ययोजना बनाई गई है। चित्रकोट, मैनपाट, सिरपुर, राजिम और हसदेव बांगो को प्रमुख पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि पर्यटन को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास का आधार बनाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन स्थलों के विकास का सीधा लाभ स्थानीय युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचे।

1,000 पर्यटन उद्यमी तैयार होंगे

मिशन के तहत 1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने और 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके अलावा 600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मियों और 500 टूर गाइड व फ्रंटलाइन कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और लोककला को बढ़ावा दिया जाएगा।

पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या दोगुनी करना और उनके औसत प्रवास की अवधि दो दिन तक बढ़ाना है। इसके लिए होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे में 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता विकसित करने की योजना है। पर्यटन क्षेत्र में 10 से 20 सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं के जरिए कम से कम 1,000 करोड़ रुपए का निजी निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

4 प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट बनेंगे

पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट विकसित किए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर 15 से 20 वे-साइड सुविधाएं और करीब 500 पर्यटन संकेतक लगाए जाएंगे। बहुभाषी वेबसाइट, मोबाइल एप, डिजिटल बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान और रियल टाइम नेविगेशन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।

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