आजादी के 78 साल बाद चांगेर गांव में पहुंची बिजली, 23 घर रोशन

DMF मद से 25.21 लाख रुपए खर्च कर कराया गया विद्युतीकरण, बच्चों को पढ़ाई और ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम में मिलेगी सुविधा
कोण्डागांव। छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले के अति दुर्गम गांव चांगेर में आजादी के करीब 78 साल बाद पहली बार बिजली पहुंची है। दशकों से अंधेरे में रहने वाले गांव के सभी 23 घर अब बिजली से रोशन हो गए हैं। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से 25.21 लाख रुपए खर्च कर गांव में विद्युतीकरण कराया गया है। बिजली पहुंचने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित चांगेर भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहा। शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता था। बच्चों को पढ़ाई के लिए लालटेन का सहारा लेना पड़ता था, वहीं रात में आवागमन और घरेलू कामकाज में भी परेशानी होती थी।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर घरेलू काम होंगे आसान
गांव में बिजली पहुंचने से अब बच्चों को शाम के समय पर्याप्त रोशनी में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीणों को घरेलू कामकाज और रात में आवागमन में भी सहूलियत होगी। बिजली की उपलब्धता से शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।
दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रहीं मूलभूत सुविधाएं
राज्य शासन और जिला प्रशासन की ओर से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। माओवाद से प्रभावित रहे इलाकों में विकास कार्यों को गति देने के प्रयासों के तहत सड़क, बिजली और अन्य सुविधाएं गांवों तक पहुंचाई जा रही हैं।
चांगेर में विद्युतीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीणों ने बिजली जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया। उनके लिए यह केवल बिजली कनेक्शन मिलने की उपलब्धि नहीं, बल्कि बेहतर जीवन और भविष्य की नई उम्मीद है।





