सऊदी की रक्षा के लिए पाकिस्तान का बड़ा बयान, कहा- किसी भी हद तक जाएंगे

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने सऊदी के समर्थन में कड़ा बयान दिया है।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि उनका देश सऊदी अरब की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर ‘किसी भी हद तक’ जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कूटनीतिक समर्थन के साथ जरूरत पड़ने पर प्रत्यक्ष रूप से भी सऊदी के साथ खड़ा रहेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब सऊदी अरब को हूती समूह की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है। हाल में सऊदी अधिकारियों ने मक्का के पास ड्रोन हमले की कोशिश को नाकाम करने का दावा किया था। क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने सहयोगी देशों से सैन्य सहायता की जरूरत भी जताई है।
मक्का समझौते के तहत तीनों देश साथ
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
पाकिस्तान ने इस समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक इसका उद्देश्य किसी देश के खिलाफ मोर्चा खोलना नहीं, बल्कि बाहरी हमले की स्थिति में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना है।
समझौते को लागू करने की दिशा में कदम
समझौते के बाद तीनों देशों ने रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। 31 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने समझौते के तहत एक सचिवालय स्थापित करने पर सहमति जताई।
इसका शुरुआती नेतृत्व तीन साल के लिए पाकिस्तानी महासचिव करेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, समझौते के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने की भी योजना है।
पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता ने सऊदी की क्षेत्रीय अखंडता के साथ-साथ मक्का और मदीना की सुरक्षा के प्रति भी अपने देश की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, मौजूदा हूती हमलों के बीच समझौते के तहत प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई किस रूप में होगी, यह अलग मुद्दा है।
हाल की रिपोर्टों में कहा गया है कि रक्षा समझौते के बावजूद सहयोगी देशों की प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी को लेकर अभी कई रणनीतिक और राजनीतिक पहलू जुड़े हुए हैं।





