किशोर की बायोग्राफी को अवॉर्ड पर सवाल, हाईकोर्ट का नोटिस

पटना। मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार की बायोग्राफी ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ को मिले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC), पुरस्कार जूरी के सदस्यों और किताब के लेखकों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि यह किताब भारतीय सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक की श्रेणी में किस आधार पर चुनी गई।
यह किताब अनिरुद्ध भट्टाचार्जी और पार्थिव धर ने लिखी है। इसे 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट सिनेमा बुक का पुरस्कार मिला था। पुरस्कार की घोषणा 16 अगस्त 2024 को हुई थी और 8 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सम्मान दिया गया था।
लेखक ने अवॉर्ड रद्द करने की मांग की
पटना के हिंदी लेखक और साहित्यिक आलोचक अनंत प्रसाद सिन्हा ने पुरस्कार को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में इस श्रेणी का पुरस्कार रद्द करने की मांग की है।
सिन्हा का दावा है कि पुरस्कार के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। उनके मुताबिक, सर्वश्रेष्ठ सिनेमा पुस्तक का सम्मान भारतीय सिनेमा पर प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ पुस्तक को दिया जाना चाहिए। उन्होंने अपनी किताब ‘दो गुलफामों की तीसरी कसम’ को भी इन मानकों के अनुरूप बताया है।
मंत्रालय और लेखकों से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई जस्टिस अजीत कुमार की अदालत में हुई। याचिका पर कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, NFDC, जूरी सदस्यों और दोनों लेखकों को नोटिस जारी किया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ पैनल वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने दर्ज किया। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
सिन्हा ने कहा कि उनकी आपत्ति पुरस्कार की पात्रता और चयन प्रक्रिया से जुड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी कलाकार की जीवनी को भारतीय सिनेमा पर किताब मानने का आधार क्या है।
क्या है दोनों किताबों में अंतर?
‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ में किशोर कुमार के जीवन, संगीत, अभिनय और व्यक्तित्व को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। वहीं, अनंत प्रसाद सिन्हा की ‘दो गुलफामों की तीसरी कसम’ फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ से 1966 में बनी फिल्म ‘तीसरी कसम’ तक की करीब छह साल की यात्रा पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के नियमों के तहत सर्वश्रेष्ठ सिनेमा पुस्तक के विजेता को स्वर्ण कमल और 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाता है। कोर्ट के समक्ष अब मंत्रालय और अन्य पक्षों के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुरस्कार चयन को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर अदालत का रुख क्या रहता है।





