CGPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को हाईकोर्ट से जमानत नहीं

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2020-21 भर्ती में कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया उनकी भूमिका सामने आती है। गंभीर बीमारी या जेल में जरूरी इलाज नहीं मिलने के पर्याप्त प्रमाण नहीं होने के कारण उन्हें PMLA के तहत विशेष छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता।
ED ने सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
33 से ज्यादा अभ्यर्थियों से 3 करोड़ लेने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद करने के बदले रकम ली गई। ED ने 3.45 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया है। आरोप है कि 33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपए जुटाए गए और अलग-अलग माध्यमों से लेन-देन किया गया।
स्वास्थ्य के आधार पर मांगी थी जमानत
सोनवानी की ओर से कोर्ट में हृदय संबंधी परेशानी का हवाला दिया गया। उनके वकील ने बताया कि 20 अगस्त 2026 को अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था और स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह दी गई थी। उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत देने की मांग की गई। हालांकि, ED ने दलील दी कि जरूरत पड़ने पर रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या एम्स में इलाज कराया जा सकता है। कोर्ट ने सह-आरोपियों को जमानत मिलने के तर्क को भी पर्याप्त नहीं माना।
170 अभ्यर्थियों का हुआ था चयन
CGPSC 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 1,29,206 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा और 509 साक्षात्कार तक पहुंचे, जबकि 170 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। मामले में CBI आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ED की जांच वित्तीय लेन-देन और अन्य लोगों की भूमिका पर केंद्रित है। सोनवानी अब सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर कर सकते हैं। मामले में लगे आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान होगा।





