सर्पदंश मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा, 19 गिरफ्तार; जांच जारी

बिलासपुर। सर्पदंश से मौत के मामलों में सरकारी मुआवजा दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है।
पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बताया कि मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें दो पुलिसकर्मी और एक तहसीलदार का ड्राइवर भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, पूरे रैकेट का मुख्य सरगना अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
एसपी रजनेश सिंह ने बताया कि आरोपी मृतकों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी मुआवजा दिलाने का झांसा देते थे।
इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुआवजा स्वीकृत कराया जाता था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, थाना संबंधी दस्तावेज, डॉक्टर, पटवारी और अन्य अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर पूरे दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
इसके आधार पर फाइल तहसीलदार कार्यालय भेजी जाती थी और मुआवजा राशि स्वीकृत कराई जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि तहसीलदार का ड्राइवर दस्तावेजों को पास कराने में अहम भूमिका निभाता था।
वह प्रत्येक मामले में एक से डेढ़ लाख रुपए लेकर मुआवजा स्वीकृत कराने का काम करता था।
वहीं, सिम्स मेडिकल कॉलेज में शव पहुंचने के बाद चौकी में पदस्थ कुछ पुलिसकर्मी रैकेट के सदस्यों को सूचना देते थे, जिसके बाद फर्जीवाड़े की पूरी प्रक्रिया शुरू होती थी।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि तहसीलदार और एसडीएम की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी।
इसके अलावा अन्य जिलों के कलेक्टरों को भी पत्र भेजकर सर्पदंश से जुड़े मुआवजा मामलों की जांच कराने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस को आशंका है कि यह फर्जीवाड़ा करोड़ों रुपए के सरकारी मुआवजे से जुड़ा हो सकता है और इसकी जड़ें प्रदेश के अन्य जिलों तक फैली हो सकती हैं।
मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई अन्य लोगों पर भी कार्रवाई होने की संभावना जताई गई है।





