छत्तीसगढ़ की खेती को हाईटेक बनाने पर जोर: 35,892 करोड़ DBT, 98% खाद-बीज उपलब्ध; प्राकृतिक खेती से 57 हजार किसान जुड़े

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार खेती को अधिक लाभकारी, तकनीक आधारित और किसान केंद्रित बनाने के लिए कई मोर्चों पर तेजी से काम कर रही है।
किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने से लेकर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
शुक्रवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी।
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और कृषि को आधुनिक बनाना है।
उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों के लक्ष्य के मुकाबले 30 जुलाई तक 15.16 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया जा चुका है।
किसानों ने अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उठाया है, जबकि करीब 4.93 लाख मीट्रिक टन खाद अभी भी उपलब्ध है। प्रमाणित बीजों का भी करीब 98 प्रतिशत भंडारण पूरा हो चुका है।
35 हजार करोड़ से ज्यादा DBT, PM-Kisan से भी बड़ी मदद
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने बताया कि कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों को 35,892.90 करोड़ रुपए की सहायता सीधे बैंक खातों में भेजी गई है।
वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपए जारी किए गए। अब तक इस योजना में किसानों को 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की सहायता मिल चुकी है।
83% बोनी पूरी, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
प्रदेश में इस बार खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक करीब 83 प्रतिशत बोनी पूरी हो चुकी है।
सरकार ने कृषि यंत्रीकरण के तहत 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराए हैं और 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए हैं। वहीं 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के विस्तार से लगभग 50 हजार किसानों को लाभ मिला है।
उद्यानिकी, डेयरी और मत्स्य पालन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सरकार के मुताबिक उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।
ऑयल पाम और बांस रोपण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पशुपालन क्षेत्र में दूध, अंडा और मांस उत्पादन बढ़ा है, जबकि दुग्ध उत्पादकों को अब हर 10 दिन में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है।
वहीं मत्स्य उत्पादन करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन पहुंच गया है, जिससे छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है।
सरकार ने दावा किया कि एग्रीस्टैक, ई-नाम और कृषि अधोसंरचना निधि जैसी योजनाओं के जरिए खेती को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण संसाधनों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ कृषि विकास के नए दौर की ओर तेजी से बढ़ रहा है।





