जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर आदिवासी क्षेत्रों में पैठ बढ़ाने में जुटी कांग्रेस

रायपुर। छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा का प्रभाव कमजोर पड़ने के बाद कांग्रेस ने अब आदिवासी इलाकों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए नई रणनीति बनाई है।
पार्टी जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर आदिवासी समाज के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। अभनपुर में आयोजित कांग्रेस के शहर एवं जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में भी नेताओं को संगठन विस्तार के साथ आदिवासी अधिकारों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
20 जून को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रशिक्षण शिविर में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ करीब 40 मिनट तक चर्चा की थी।
बैठक में प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य फोकस आदिवासी क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनसंपर्क बढ़ाने पर रहा।
इससे पहले 12 जून को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में भी आदिवासी बहुल इलाकों में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति तैयार की गई थी। पार्टी ने खनिज संसाधनों, वनाधिकार, भूमि अधिकार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर जनआंदोलन खड़ा करने की रूपरेखा बनाई है।
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने बस्तर और सरगुजा संभाग में धरना-प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान भी शुरू कर दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता से भाजपा के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। वहीं विकास परियोजनाओं और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर समन्वित रणनीति तैयार करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने हाल ही में छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस सलाहकार परिषद का गठन किया है।
परिषद में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज सहित 19 वरिष्ठ आदिवासी नेताओं को शामिल किया गया है, जबकि 30 नेताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।





