तारा कोल ब्लॉक पर CMDC का स्पष्टीकरण, अभी सिर्फ हुई है नीलामी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में तारा कोल ब्लॉक को लेकर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) ने स्थिति स्पष्ट की है। निगम के मुताबिक अभी तारा कोल ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है।
नीलामी जीतने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित कंपनी को तत्काल खनन की अनुमति मिल गई है। वास्तविक खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति और अन्य जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में कुल 9 बोलियां मिली थीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited को मिला है। निगम ने कहा है कि सभी निर्धारित स्वीकृतियां और प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही खनन गतिविधियां शुरू की जा सकेंगी।
वन और पर्यावरण मंजूरी अलग प्रक्रिया
CMDC के अनुसार खनन शुरू होने से पहले वन स्वीकृति के विभिन्न चरण पूरे करने होंगे। पर्यावरणीय प्रभावों का निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा। जरूरी अनुमतियों के बिना पेड़ों की कटाई या वास्तविक खनन शुरू नहीं किया जा सकता। यानी नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और खनन की अनुमति तीन अलग-अलग चरण हैं।
तारा का आवंटन पहले भी हुआ था
निगम के अनुसार तारा कोल ब्लॉक वर्ष 2011 में CMDC को आवंटित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन भी निरस्त हो गया। इसके बाद वर्तमान व्यवस्था में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी अपनाई गई है।
मोरगा ब्लॉक का मामला भी लंबित
हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग का मामला सिर्फ तारा तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन को लेकर भी पहले राज्य सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया था। वहीं तारा समेत कुछ ब्लॉकों को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन में जैव विविधता, वन्यजीव और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किया गया है।
CMDC ने कहा कि किसी भी खनन परियोजना में प्रतिपूरक वनीकरण और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन जरूरी होगा। निगम के मुताबिक ऊर्जा जरूरतों, विकास, वन संरक्षण और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाकर ही आगे की प्रक्रिया होगी।





