धान से आगे बढ़ी खेती, किसानों की आय के नए रास्ते खुले

रायपुर। छत्तीसगढ़ की पहचान भले ही लंबे समय से ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है, लेकिन अब राज्य की खेती पारंपरिक धान उत्पादन से आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के कार्यकाल में फसल विविधीकरण, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, बागवानी और आधुनिक तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। इसका असर खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाओं, उर्वरक और आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है।
कई किसान अब धान के साथ अदरक, गेंदा, सब्जियों और अन्य नगदी फसलों की खेती कर अतिरिक्त आय हासिल कर रहे हैं। युवा किसान मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को भी खेती के साथ जोड़ रहे हैं।
किसानों को सीधे आर्थिक मदद
कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों के खातों में 35,892.90 करोड़ रुपए की सहायता राशि ट्रांसफर की गई। खरीफ धान पर आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपए मिले।
गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
दूसरी फसलों पर 15 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन
सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ तक प्रोत्साहन दे रही है। अरहर, मूंग, उड़द, चना, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी, तिल के साथ मक्का, कपास और कोदो-कुटकी, रागी व बाजरा जैसी फसलों को इसमें शामिल किया गया है।
मशीनों और बागवानी से बढ़ रही कमाई
फार्म मशीनरी बैंक से छोटे किसान किराये पर आधुनिक मशीनें ले पा रहे हैं। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों से पानी की बचत हो रही है। वहीं बागवानी का क्षेत्र 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर हो गया है।
फल, सब्जी, मसाले, फूल, तेल पाम और बांस जैसी फसलों का विस्तार हो रहा है। अब सरकार का फोकस उत्पादन के साथ पैक हाउस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रसंस्करण और बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने पर है।





