मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के 36 युवाओं से मिले CM साय, साझा किए संघर्ष के अनुभव

बोले- जनकल्याण को कार्य का केंद्र बनाएं, ज्ञान और कौशल से प्रदेश के विकास में दें योगदान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के दूसरे बैच के 36 युवा प्रतिभागियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जनसेवा की यात्रा के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे फेलोशिप के दौरान शासन की कार्यप्रणाली समझने के साथ अपने ज्ञान, कौशल और नए विचारों से जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।
साय ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ भी आगे बढ़ रहा है। युवाओं को जिलों में काम करते समय स्थानीय जरूरतों को समझकर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक सुझाव देने चाहिए।
10 साल की उम्र में संभाली परिवार की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि करीब 10 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी भी संभालनी पड़ी। उन्होंने खुद बैलों से हल चलाया और खेती के काम किए। साय ने कहा कि इन परिस्थितियों ने उन्हें परिश्रम और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे सरपंच बनेंगे, लेकिन इसके बाद विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिला।
700 रोजगार मेलों से 24 हजार युवाओं को काम
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब ढाई साल में 700 से अधिक रोजगार मेलों के जरिए लगभग 24 हजार युवाओं को रोजगार मिला है। राज्य में 30 आईटीआई का उन्नयन किया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का लक्ष्य निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलना है।
साय ने बताया कि एआई मिशन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने और करीब 1,500 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। नवा रायपुर में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों की अस्पताल सुविधाओं से भी रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
दो साल की फेलोशिप में 19 महीने मैदानी अनुभव
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने बताया कि फेलोशिप के दूसरे बैच में इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र जैसी पृष्ठभूमि के 36 युवाओं का चयन हुआ है। दो वर्षीय कार्यक्रम में पांच महीने अध्ययन एवं प्रशिक्षण और 19 महीने मैदानी अनुभव के लिए निर्धारित हैं। शुरुआती तीन महीने आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण के बाद फेलो जिला प्रशासन के साथ काम करेंगे। वे योजनाओं की निगरानी, नीतिगत विश्लेषण और जनसेवाओं में सुधार के लिए सहयोग देंगे।





