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अकादमिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कर्मचारी हितों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़

रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग अकादमिक गुणवत्ता, रोजगार सृजन और कर्मचारी कल्याण को साथ लेकर व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए पदोन्नति, नई भर्तियों, सेवा सुरक्षा, वित्तीय लाभ और शोध को बढ़ावा देने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इन कदमों से न केवल शिक्षकों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 362 सहायक प्राध्यापकों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया है। वहीं 152 प्रोफेसरों को स्नातक महाविद्यालयों का प्राचार्य और 7 प्राचार्यों को स्नातकोत्तर (पीजी) प्राचार्य बनाया गया है। इससे कॉलेजों में अनुभवी नेतृत्व को बढ़ावा मिला है और शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था अधिक मजबूत हुई है।

रोजगार के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शासकीय महाविद्यालयों में 595 प्राध्यापक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा 700 नए पदों को मंजूरी दी गई है, जिनमें 625 सहायक प्राध्यापक, 50 ग्रंथपाल और 25 क्रीड़ाधिकारी शामिल हैं। यह भर्ती अभियान प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का बड़ा अवसर लेकर आया है। साथ ही, 4 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित सीजी-सेट परीक्षा भी अकादमिक क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

विभाग ने कर्मचारियों के हितों को भी प्राथमिकता दी है। 72 सहायक प्राध्यापकों को 37.23 करोड़ रुपये का एरियर जारी किया गया है, जबकि 935 सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त कर उन्हें सेवा स्थायित्व प्रदान किया गया। इसके अलावा 577 सहायक प्राध्यापकों को पीएचडी करने की अनुमति देकर शोध और नवाचार को प्रोत्साहित किया गया है।

तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने के लिए 247 प्रयोगशाला तकनीशियनों और 399 प्रयोगशाला परिचारकों की नियुक्ति की गई है। वहीं कर्मचारी कल्याण के तहत 34 अनुकंपा नियुक्तियां दी गईं और 118 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान किया गया।

उच्च शिक्षा विभाग की ये पहलें स्पष्ट करती हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, रोजगार, शोध और कर्मचारी सम्मान के माध्यम से राज्य के समग्र विकास का आधार बना रही है। इससे प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ भविष्य के लिए सक्षम और आत्मनिर्भर शैक्षणिक वातावरण तैयार हो रहा है।

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