अन्नामलाई 14 सितंबर को करेंगे नई पार्टी का ऐलान, 50 साल से कम उम्र के नेताओं को मिलेगी जिम्मेदारी

नई दिल्ली। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं। अन्नामलाई 14 सितंबर को अपनी नई पार्टी के नाम, संगठन और नीतियों की घोषणा करेंगे। इसके बाद नवंबर-दिसंबर में वे पूरे तमिलनाडु का दौरा कर जनसंपर्क अभियान चलाएंगे।
अन्नामलाई इन दिनों ‘वी द लीडर’ आंदोलन के जरिए युवाओं को जोड़ने में जुटे हैं। उन्होंने अपने गृह क्षेत्र अरावकुरिची में कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण शिविर भी शुरू किया है। उनकी प्रस्तावित पार्टी के जिला समन्वयकों में 50 साल से कम उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
अन्नामलाई की रणनीति मुख्य रूप से दो क्षेत्रों पर केंद्रित बताई जा रही है। पहला, ओबीसी और एमबीसी (मोस्ट बैकवर्ड क्लास) वोट बैंक। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके ने दलित और अल्पसंख्यक वोटों में पकड़ बनाई है। ऐसे में अन्नामलाई गैर-दलित वर्गों, खासकर ओबीसी, एमबीसी और सामान्य वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश करेंगे।
दूसरा फोकस कोंगु क्षेत्र पर होगा। पश्चिमी तमिलनाडु का यह इलाका राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां विधानसभा की 57 सीटें हैं और किसान, व्यापारी तथा मध्यम वर्ग के मतदाता बड़ी संख्या में हैं।
अन्नामलाई ने 25 अगस्त 2020 को भाजपा का दामन थामा था। कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई को पार्टी ने पहले प्रदेश उपाध्यक्ष और फिर 2021 में तमिलनाडु भाजपा का अध्यक्ष बनाया। उन्होंने ‘एन मन्न, एन मक्कल’ यात्रा के जरिए पूरे राज्य में जनसंपर्क किया और डीएमके सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार व कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए।
हालांकि 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। 2026 के चुनाव में भाजपा को सिर्फ एक सीट मिली, जबकि अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक प्रभाव दिखाया।
अन्नामलाई ने जून 2026 में भाजपा से इस्तीफा देते हुए कहा था कि पिछले 18 महीनों से पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद चल रहे थे। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति को आगे बढ़ाने के तरीके को लेकर उनके विचार अब पार्टी नेतृत्व से अलग हो चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अन्नामलाई के अलग होने से भाजपा को युवा चेहरा खोने का नुकसान हो सकता है। वहीं, अन्नामलाई के सामने अपनी नई पार्टी को संगठन और वोट बैंक के स्तर पर मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उनकी नई राजनीतिक पहल तमिलनाडु की सियासत में नया समीकरण बना सकती है।





