मक्का की उन्नत खेती के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, संतुलित खाद और सही दूरी से बढ़ेगा उत्पादन

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने मक्का उत्पादक किसानों के लिए राज्य स्तरीय कृषि सलाह जारी की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम को मक्का की बुवाई के लिए अनुकूल बताते हुए किसानों से समय पर वैज्ञानिक पद्धति से बोनी करने की अपील की है। उनका कहना है कि सही तकनीक अपनाने से उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों में सीधी बुवाई और कतार पद्धति से मक्का लगाने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार संकर (हाइब्रिड) किस्मों के लिए 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा संकुल या संयुक्त किस्मों के लिए 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है।
बेहतर फसल प्रबंधन के लिए कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है। वहीं मध्यम और देर से पकने वाली किस्मों के लिए 75×25 सेंटीमीटर की दूरी पर बुवाई करना अधिक उपयुक्त बताया गया है। इससे पौधों का बेहतर विकास होता है और उत्पादन बढ़ता है।
विश्वविद्यालय ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर भी जोर दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रति हेक्टेयर 80 से 120 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन), 50 से 75 किलोग्राम स्फुर (फास्फोरस) और 30 से 50 किलोग्राम पोटाश का उपयोग निर्धारित मात्रा में करना चाहिए। संतुलित पोषण से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और अधिक उपज प्राप्त होती है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से मौसम आधारित सलाह का पालन करते हुए समय पर बुवाई करने की अपील की है। उनका कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को अपनाकर किसान अधिक उत्पादन के साथ बेहतर आय हासिल कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने किसानों से कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का लाभ उठाने की भी अपील की है।





