गन्ने में सफेद मक्खी का बढ़ा खतरा, मौसम साफ होने पर ही करें कीटनाशक का छिड़काव: कृषि वैज्ञानिक

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए मौसम आधारित विशेष कृषि सलाह जारी की है। वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम और गन्ने की वृद्धि अवस्था को देखते हुए किसानों को सफेद मक्खी के बढ़ते प्रकोप से सतर्क रहने और समय पर वैज्ञानिक तरीके से कीट नियंत्रण करने की सलाह दी है।
विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार इस समय गन्ने की फसल पर सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई) के आक्रमण की आशंका अधिक रहती है। यह कीट अपनी शिशु और प्रौढ़ दोनों अवस्थाओं में गन्ने की पत्तियों का रस चूसता है, जिससे पौधों की सामान्य वृद्धि प्रभावित होती है। इसके कारण गन्ने में शर्करा (चीनी) की मात्रा भी कम हो जाती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि कीटनाशकों का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही करें। बारिश या तेज हवा के दौरान छिड़काव से बचें, क्योंकि इससे दवा का प्रभाव कम हो जाता है। सुबह या शाम के समय छिड़काव करना अधिक प्रभावी माना जाता है।
सफेद मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए कृषि विश्वविद्यालय ने फेनिट्रोथियान 50 ईसी का 2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी है। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिन के अंतराल में दोबारा छिड़काव करने की भी अनुशंसा की गई है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि समय पर कीट प्रबंधन अपनाने से गन्ने की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। किसानों से मौसम की जानकारी पर नजर रखने और कृषि विभाग तथा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही कीटनाशकों का उपयोग करने की अपील की गई है, ताकि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों सुरक्षित रह सकें।





