5 काम एक साथ, सालाना 1.50 लाख से ज्यादा कमाई: बस्तर की रैबाली ने बदली खेती की तस्वीर; बकरी, गाय, मुर्गीपालन के साथ सुगंधित धान-सब्जियों से मुनाफा

एकीकृत कृषि क्लस्टर से जुड़कर शुरू की पांच गतिविधियां, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें हो रहीं पूरी; गांव की दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
बस्तर। खेती को सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय पशुपालन और सब्जी उत्पादन से जोड़ दिया जाए तो किसान सालभर कमाई कर सकता है। बस्तर संभाग के बस्तर जिले के छिंदगांव की ग्रामीण महिला रैबाली कश्यप ने एकीकृत कृषि को अपनाकर इसका उदाहरण पेश किया है। जागृति महिला समूह से जुड़ी रैबाली ने अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
पहले रैबाली की खेती से होने वाली आमदनी परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करने तक सीमित थी। इसके बाद वह एकीकृत कृषि क्लस्टर से जुड़ीं और पारंपरिक खेती के साथ अलग-अलग गतिविधियां शुरू कीं। उन्होंने अपनी जमीन पर बकरीपालन, गायपालन, मुर्गीपालन, सुगंधित धान और हरी सब्जियों का उत्पादन एक साथ शुरू किया।
5 गतिविधियों से अलग-अलग आय
रैबाली को बकरीपालन से सालाना करीब 60 हजार रुपए, मुर्गीपालन से 30 हजार, सब्जी उत्पादन से 24 हजार और गायपालन से करीब 20 हजार रुपए की आय हो रही है। वहीं सुगंधित धान से करीब 20 हजार रुपए अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर रही हैं। इस तरह सभी गतिविधियों को मिलाकर वह सालाना 1.50 लाख रुपए से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।
एक ही खेती व्यवस्था में कई गतिविधियां होने से किसी एक फसल या उत्पाद पर निर्भरता कम हुई है। पशुपालन से दूध, मांस और अंडे मिल रहे हैं, जबकि धान और सब्जियों से परिवार को पौष्टिक भोजन के साथ बाजार से आय भी हो रही है।
परिवार का आर्थिक संबल बनीं
रैबाली अब अपने परिवार का प्रमुख आर्थिक सहारा बन चुकी हैं। बढ़ी हुई आय से बच्चों की बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
रैबाली किसानों को एकीकृत कृषि अपनाने का संदेश दे रही हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग कृषि गतिविधियों को साथ लेकर चलने से आय के साधन बढ़ते हैं और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।





