छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य केंद्रों में 578 फार्मासिस्ट पद खाली: ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण प्रभावित, 40 हजार युवा भर्ती के इंतजार में

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्टों की भारी कमी से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। दवा वितरण, दवा प्रबंधन और मरीजों को सही परामर्श देने जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
प्रदेश के 6,290 शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्टों के कुल 1,568 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से 578 पद अभी भी रिक्त हैं। यानी करीब 37 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में केवल 990 फार्मासिस्ट ही कार्यरत हैं। ऐसे में कई स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं का वितरण प्रशिक्षित फार्मासिस्टों के बजाय अन्य कर्मचारियों के भरोसे हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को दवा कब और कैसे लेनी है, भोजन से पहले या बाद में सेवन करना है और किन दवाओं के साथ परहेज जरूरी है, इसकी सही जानकारी देना फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी होती है। इनके अभाव में मरीजों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन (आईपीए) ने रिक्त पदों पर जल्द भर्ती, पदोन्नति और केंद्र सरकार के फार्मासिस्ट भर्ती एवं सेवा विनियम-2025 को प्रदेश में लागू करने की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश में लगभग 40 हजार पंजीकृत फार्मासिस्ट रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक पद खाली हैं।
फार्मेसी अधिनियम-1948 के अनुसार डॉक्टर के पर्चे पर दवा वितरण केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही कर सकता है। अनधिकृत व्यक्ति से दवा वितरण कराए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फार्मासिस्ट केवल दवा बांटने का काम नहीं करते, बल्कि दवा की गुणवत्ता, स्टॉक प्रबंधन, मरीजों को परामर्श और सुरक्षित उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की आवश्यकता बताई जा रही है।





