पूर्व MLA सहित परिवार के 8 लोगों की हत्या करने वाली बेटी होगी रिहा? सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

दिल्ली। हरियाणा के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के सात अन्य सदस्यों की हत्या के मामले में दोषी सोनिया और संजीव कुमार की समयपूर्व रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत में दोनों दोषियों की रिहाई से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। पीड़ित परिवार की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट ने दोषियों की समयपूर्व रिहाई के मामले पर पुनर्विचार करने और उन्हें अंतरिम जमानत देने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अपराध की गंभीरता, जेल में दोषियों के आचरण और उनके सुधार से जुड़े पहलुओं पर दलीलें रखी गईं।
रिहाई पर दोनों पक्षों ने रखी दलीलें
पीड़ित परिवार के अधिवक्ताओं आईना वर्मा खोवाल और लाल बहादुर खोवाल के मुताबिक, अदालत को बताया गया कि केवल लंबे समय तक जेल में रहने या हाल के वर्षों में अच्छे आचरण के आधार पर समयपूर्व रिहाई का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता। मामले में अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता पर भी विचार किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने और उसके बाद दोषियों की रिहाई से जुड़े व्यापक सवालों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि क्षमाशील रवैये की भी एक सीमा होनी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
2001 में हुई थी आठ लोगों की हत्या
यह मामला वर्ष 2001 का है। रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के सात अन्य सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। मृतकों में तीन नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। इनमें एक बच्ची की उम्र महज डेढ़ महीने बताई गई थी।
इस मामले में सोनिया और संजीव को दोषी ठहराया गया था। अब उनकी समयपूर्व रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी नजर है। फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा जाएगा या उसमें बदलाव होगा।





