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पंजाब में फिर साथ आएंगे अकाली दल-BJP? 2027 चुनाव से पहले गठबंधन की अटकलें तेज; सुखबीर बादल के फैसले पर टिकी नजरें

दिल्ली। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दोबारा गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अकाली दल के कई वरिष्ठ नेता BJP के साथ आने के पक्ष में बयान दे चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पंजाब में 2027 में NDA की सरकार बनाने की बात कह चुके हैं। हालांकि, गठबंधन पर अंतिम फैसला अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को करना है।

PM मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा

7 अगस्त को सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद गठबंधन की अटकलों को और हवा मिली। इसके बाद 20 अगस्त को सांसद हरसिमरत कौर बादल ने गठबंधन की संभावना जताई।

उन्होंने कहा कि पहले दिल्ली से पंजाब के विकास के काम होते थे और ऐसी व्यवस्था फिर बननी चाहिए। अगले दिन बिक्रम सिंह मजीठिया और वरिष्ठ नेता सिकंदर सिंह मलूका ने भी दोनों दलों के साथ आने के संकेत दिए।

हालांकि, हरसिमरत कौर ने बाद में अपने बयान को गलत समझे जाने की बात कही। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं कर चुके हैं।

अलग चुनाव लड़ने से दोनों को हुआ नुकसान

चुनावी आंकड़े बताते हैं कि 2017 में गठबंधन के दौरान अकाली दल ने 15 और BJP ने 3 विधानसभा सीटें जीती थीं। 2022 में अलग-अलग चुनाव लड़ने पर अकाली दल को सिर्फ 3 और BJP को 2 सीटें मिलीं।

लोकसभा चुनाव में भी 2019 में दोनों ने मिलकर 37.08% वोट हासिल किए थे। 2024 में अलग-अलग लड़ने पर अकाली दल का वोट शेयर 13.42% और BJP का 18.56% रहा। दोनों का कुल वोट शेयर 31.98% था, लेकिन BJP एक भी सीट नहीं जीत सकी और अकाली दल को सिर्फ एक सीट मिली।

किसान आंदोलन बन सकता है सबसे बड़ी बाधा

अकाली दल के लिए गठबंधन राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश भी माना जा रहा है। पार्टी के पास फिलहाल एक विधायक और एक लोकसभा सांसद है। वहीं, दूसरे अकाली गुटों की चुनौती से उसका पारंपरिक वोट बैंक भी प्रभावित हो रहा है।

लेकिन BJP के साथ आने की राह आसान नहीं है। अकाली दल ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में BJP से गठबंधन तोड़ा था। किसान आंदोलन और किसानों की मौतों का मुद्दा आज भी पंजाब की राजनीति में अहम है। इसके अलावा बेअदबी और नशे जैसे मुद्दों पर भी अकाली दल को घेरा जाता है।

सुखबीर बादल ने नहीं खोले पत्ते

2 नवंबर को अमित शाह के NDA सरकार बनाने वाले बयान पर सुखबीर बादल ने कहा था कि वह ज्योतिषी नहीं हैं और लोगों को कुछ दिन इंतजार करना चाहिए। दूसरी ओर, पंजाब BJP के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कह चुके हैं।

ऐसे में 2027 से पहले गठबंधन पर फैसला दोनों दलों के लिए अहम होगा। अकाली दल को जहां अपना बिखरता जनाधार बचाना है, वहीं BJP को बढ़ते वोट शेयर को विधानसभा सीटों में बदलने की चुनौती है। गठबंधन दोनों को फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन किसान आंदोलन से जुड़ा पुराना विवाद इसकी राह में सबसे बड़ी अड़चन बन सकता है।

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