अर्बन चैलेंज फंड से बदलेगी छत्तीसगढ़ के शहरों की तस्वीर, 1 लाख करोड़ के फंड से विकास को मिलेगी गति

CM साय बोले- भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनाएं योजनाएं, नगरीय विकास के लिए दो एमओयू
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों में सुनियोजित विकास और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए अर्बन चैलेंज फंड से नई संभावनाएं खुलेंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को नवा रायपुर में आयोजित अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो की पहली क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए नगरीय निकायों से भविष्य की जरूरतों के अनुरूप परियोजनाएं तैयार करने को कहा। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुसार, केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर केवल आवास और नागरिक सुविधाओं के केंद्र नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख आधार हैं। विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसलिए विकास योजनाएं ऐसी हों, जो नागरिकों का जीवन आसान बनाने के साथ शहरों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करें।
नगरीय विकास के लिए दो एमओयू
कार्यशाला के दौरान नगरीय विकास को गति देने के लिए दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। पहला एमओयू हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच, जबकि दूसरा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच हुआ। इनके जरिए नगरीय निकायों को परियोजना निर्माण, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकास में सहयोग मिलेगा।
जलभराव और अव्यवस्थित तारों की समस्या पर जोर
साय ने कहा कि शहरों में जलभराव, पेयजल, सड़क, बिजली, परिवहन और स्वच्छता जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है। जल निकासी की व्यवस्था दीर्घकालिक योजना के आधार पर विकसित की जाए। जहां संभव हो, बिजली और अन्य सेवाओं के तार भूमिगत करने की योजनाएं भी बनाई जाएं। विभागों के बीच समन्वय से ही बेहतर शहरी व्यवस्था तैयार हो सकेगी।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि नगरीय निकायों को फंड का लाभ लेने के लिए गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं बनानी होंगी। परियोजनाओं के निर्माण के साथ उनके संचालन और रखरखाव की योजना भी जरूरी है।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना होगा। कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने आधुनिक शहरी नियोजन तथा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की।





