ममता बनर्जी के समर्थन में आया TMC का बागी गुट

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान के बीच ऋतब्रत बनर्जी गुट ने बड़ा बयान दिया है। गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ती हैं तो उनका गुट उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगा। ममता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी मैदान में उतरती हैं, तब भी उनका गुट मुकाबला नहीं करेगा।
ऋतब्रत ने कहा कि वे ममता बनर्जी को विधानसभा में वापस देखना चाहते हैं। उनके मुताबिक ममता का नंदीग्राम से चुनाव लड़ना बेहतर विकल्प होगा। उन्होंने बताया कि गुट ने उपचुनाव के लिए उम्मीदवार लगभग तय कर लिया है, लेकिन ममता के मैदान में उतरने की स्थिति में उस नाम को वापस ले लिया जाएगा।
नंदीग्राम TMC और भाजपा के लिए अहम
नंदीग्राम लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का केंद्र रहा है। 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ममता बनर्जी के राजनीतिक उभार में अहम रहा था। 2021 में ममता ने नंदीग्राम से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गई थीं।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया। अधिकारी को 73,917 और ममता को 58,812 वोट मिले। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
लेफ्ट ने उम्मीदवार उतारा
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए लेफ्ट फ्रंट ने शनिवार को उम्मीदवार घोषित कर दिए। CPI ने नंदीग्राम से शांतिगोपाल गिरी और CPI(M) ने रेजीनगर से सईद असद अली को टिकट दिया है। भाजपा और TMC ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।
TMC में संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद
उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC के भीतर संगठन और पार्टी के नाम को लेकर खींचतान चल रही है। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और फंड पर दावा कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने शनिवार को दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। ऋतब्रत गुट ने कहा है कि वह TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा जारी रखेगा। आयोग के फैसले के बिना नामांकन की समयसीमा खत्म होने पर गुट निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर भी चुनाव लड़ने का विकल्प रखता है।





